विज्ञापन

हौसला

Dinesh Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लोग कदमों से मंज़िल की माप करते हैं
        
                                                    
                            
गुणा-भाग में ही सुबह से शाम करते हैं
आप नील गगन के वह स्वछंद परिंदे हैं
जो बस अपनी उड़ान में विश्वास रखते हैं।

लोग हवाओं के साथ साथ चलते हैं
सहारा लेकर एक एक कदम रखते हैं
आप वह नीर हैं जो तपकर गर्म धूप में
बादल बन नील गगन की सैर करते हैं।

तूफ़ानों से डरकर लोग मंजिल छोड़ देते हैं
अपने बढ़ते हुए कदमों को पीछे मोड़ लेते हैं
आप के फ़ौलादी इरादों से कहां टकरायेगा भला कौन
क्योंकि मंजिल की हर बाधाओं को आप तोड़ देते हैं।


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10278 कविताएं

View Profile