लोग कदमों से मंज़िल की माप करते हैं
गुणा-भाग में ही सुबह से शाम करते हैं
आप नील गगन के वह स्वछंद परिंदे हैं
जो बस अपनी उड़ान में विश्वास रखते हैं।
लोग हवाओं के साथ साथ चलते हैं
सहारा लेकर एक एक कदम रखते हैं
आप वह नीर हैं जो तपकर गर्म धूप में
बादल बन नील गगन की सैर करते हैं।
तूफ़ानों से डरकर लोग मंजिल छोड़ देते हैं
अपने बढ़ते हुए कदमों को पीछे मोड़ लेते हैं
आप के फ़ौलादी इरादों से कहां टकरायेगा भला कौन
क्योंकि मंजिल की हर बाधाओं को आप तोड़ देते हैं।
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