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शिक्षक दिवस पर दोहे....

Dinesh Pratap

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने शिक्षक की कथा, कैसे करें बखान,
        
                                                    
                            
ईश्वर का अवतार है, रूप धरे इंसान।

शिक्षक पारस मानिये, खुद को लोहा मान,
उसको छूते ही बनें, सारे कनक समान ।

पहली शिक्षक माँ सदा, पिता दूसरा जान,
सबसे पहली सीख दें, पहला दें ये ज्ञान।

कच्ची मिट्टी गूँथ वो, देता चाक चढ़ाय,
तपा ज्ञान की अगन में, शिक्षक घड़ा बनाय।

शिक्षक ऎसा होत है, जैसे शीतल नीर,
प्यास बुझा दे ज्ञान की, हर ले सारी पीर।

शिक्षक ऐसी नाव है, उस तट पर ले जाय,
जहाँ ज्ञान की भूख को, सही ग़िज़ा मिल पाय।

- दिनेश प्रताप सिंह चौहान

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8 वर्ष पहले
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