बात जो मेरे दिल में है उसे बता देता,
वो अगर हंस देती तो मैं भी मुस्कुरा देता,
यह ऊपर वाला है जिसने मुझे संभाल रखा है,
मैं अगर खुद के हाथों में होता तो गिरा देता!
जिसे पहले ही मिल चुकी हो मौत की सजा,
उसे अब देता भी तो भला वो क्या सजा देता!
वह जब भी मुझे कोई नया जख्म आता करता,
तो मै उसकी दुआ में अपने दोनों हाथ उठा देता!
वह तो गुलशन में खड़ा एक शजर निकला,
गर वो किसी बाग़ का फूल होता तो चुरा लेता!
बहाव उसकी बातों में किसी सैलाब से कम न था,
मैं उसके रस्ते में अगर पढ़ता तो बहा देता!
Dheeraj yadav (unnao)u. P.
8532828186
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