जो दिल में बसे थे आज वो मजबूर हो गए है
कितने वो पास हो कर भी दूर हो गए है
ये जिंदगी हमारी उन्हीं की दी हुई है
पर पा कर इसे हम कितने मगरूर हो गए है
क्या दौर है कि काँटों को कोई पूछता नहीं है
जिनकी चुभन के कारण फूल मशहूर हो गए है
जब कुछ नहीं थे सोचा थे उनके लिए कुछ करेंगे
कुछ होने पर अब सब वो खयालात काफ़ुर हो गए है
जाने किस घड़ी मे दिलों को दर्पण का खिताब दे डाला
इंकार पर उनके दिल ये गिरकर चूर चूर हो गए है
दिल के लिए जिस किसी से पूछा औरों का हो चुका था
अब मेरे लिए हसीनों के दिल कोहिनूर हो गए है