विज्ञापन

इश्क नया अंदाज़

CHANDRA KANT

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो दिल में बसे थे आज वो मजबूर हो गए है
        
                                                    
                            
कितने वो पास हो कर भी दूर हो गए है
ये जिंदगी हमारी उन्हीं की दी हुई है
पर पा कर इसे हम कितने मगरूर हो गए है
क्या दौर है कि काँटों को कोई पूछता नहीं है
जिनकी चुभन के कारण फूल मशहूर हो गए है
जब कुछ नहीं थे सोचा थे उनके लिए कुछ करेंगे
कुछ होने पर अब सब वो खयालात काफ़ुर हो गए है
जाने किस घड़ी मे दिलों को दर्पण का खिताब दे डाला
इंकार पर उनके दिल ये गिरकर चूर चूर हो गए है
दिल के लिए जिस किसी से पूछा औरों का हो चुका था
अब मेरे लिए हसीनों के दिल कोहिनूर हो गए है
11 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Jagdish Prasad

514 कविताएं

View Profile

User

66 कविताएं

View Profile