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हसीना ज़हीन हो तो उसके कदमों में जहान झुकता है

Ashvinder Bawa

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हसीना ज़हीन हो तो उसके कदमों में जहान झुकता है
        
                                                    
                            
गुलफाम से चेहरे का हुस्न शबनम का काम करता है

माहताब भी चमक बटोरे खूब सीरती से,
हुस्न शोख आंखों का,अक्स ए कमर का काम करता है

चमक गेसुओं की बन जाएं बदलियां
जानिब ऐ पाकीज़गी ,कोई झुक कर सलाम करता है

लब ए गुलरंग की तबस्सुम सुर्ख रुह करे
नज़ाकत ए हुसन सरताज , जब शीरीन कलाम होता है।

जमाल ए बातिन हुस्न को दिलकश करे
"अश्क " जब रूहानी एहसासात कत्लेआम करता है।
- अश्विंदर बावा "अश्क"


 
2 घंटे पहले
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