खुदा की तो बहुत कर ली चलो खुद की इबादत करके देखते हैं
अभी तक तो औरों से ही की है चलो खुद से मोहब्बत करके देखते हैं।।
है शिकायत अगर ये कि लोग हमारी कदर नहीं करते,
चलो एक बार फिर खुद की कदर करके देखते हैं।
अब तक लगी है जिंदगी एक उदास शाम की तरह
चलो अब इसे एक मुस्कुराती शहर करके देखते हैं।
हमने नजरों को तोला है बहुत,
अब अपनी तरफ भी नजर करके देखते हैं।
महफिल-ए-इश्क में तो हर चीज अच्छी लगती है,
गम-ए-तन्हाई से भी गुजर करके देखते हैं ।।
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