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इबादत करके देखते हैं...

Asheesh Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुदा की तो बहुत कर ली चलो खुद की इबादत करके देखते हैं
        
                                                    
                            
अभी तक तो औरों से ही की है चलो खुद से मोहब्बत करके देखते हैं।।

है शिकायत अगर ये कि लोग हमारी कदर नहीं करते,
चलो एक बार फिर खुद की कदर करके देखते हैं।

अब तक लगी है जिंदगी एक उदास शाम की तरह
चलो अब इसे एक मुस्कुराती शहर करके देखते हैं।

हमने नजरों को तोला है बहुत,
अब अपनी तरफ भी नजर करके देखते हैं।

महफिल-ए-इश्क में तो हर चीज अच्छी लगती है,
गम-ए-तन्हाई से भी गुजर करके देखते हैं ।।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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