मैं हूँ जूता,सुनो मेरी आत्मकथा
आज बता रहा हूँ अपना महत्व और महिमा
मैं सिद्ध कर दूँगा, छोटा-बड़ा कुछ नहीं होता, कोई नहीं होती सीमा
मेरे जैसी एक साधारण सी वस्तु से लें संदेश असाधारण
जबकि समझते हो मुझे छोटा और पैरों में करते हो धारण
मुझे मत समझो कोई वस्तु साधारण
बदला है मैंने रूप, पत्तियां लपेटने से, अब आधुनिक डिजाइन में हूँ मिलता
महिलाओं के ऊँची-एड़ी से लेकर कोल्हापुरी और जापानी गेता
मनुष्य को ऊँचा उठा सकते हैं संगति, आचरण और व्यवहार
साधारण-सा जूता भी जिसके साथ रहता,पाता है सम्मान उसी अनुसार
आपने मुहावरों में कुछ विशेषताएँ जोड़ रखी हैं मेरे साथ
जूता काटता है, दोस्ती निभाता है, खाया जाता है
सम्मान दिलाता है, औषधि है, जूते का होता है शादियों में अपहरण
मुझे मत समझो कोई वस्तु साधारण
हम दिलाते हैं सम्मान
फुटबॉल में सबसे अधिक गोल करने वाले को दिया जाता है “सोने का जूता” उपहार
फ़िल्मो में भी श्रेष्ठ कलाकारों को दिए जाते है “सोने के जूते” के पुरस्कार
होली पर पहनाई जाती जूतों की माला मूर्ख को बैठाकर
जब खनिक मर जाते तब हमको मेज़ पर रखा जाता, दिखाने को सम्मान
सहता हूँ भूमि की कठोर-गर्म सतह और कांटे तुम्हारे कारण
मुझे मत समझो कोई वस्तु साधारण
मिर्गी का दौरा पड़ने पर, हमें सुंघा कर लेते औषधि का काम
शादी में करना मेरा अपहरण,धन पाना, दूल्हे की सालियाँ समझती हैं शान
मेरी नागरिकता भी होती है, एक गीत ने तो जोड़ दिया,मेरे साथ जापान
हमने ही “सिंडरेला ” को दिलवाया था राजकुमारी का सम्मान
हमेशा जोड़ीदार के साथ रहता, एक टूट जाए तो दूसरा भी हो जाता है बेकार
दुनिया में हम ही है जिनकी जोड़ी है अखंड, चलते भी साथ रुकते भी है साथ
हुआ महा-संग्राम, विभीषण गए राम के पास जब जूता मारे थे रावण
मुझे मत समझो कोई वस्तु साधारण
नहीं लेकर जाया जाता मंदिरों के अंदर, समझा जाता भगवान का अपमान
कुछ लोग पार्टियों से नया लाना, पुराने छोड़ जाना समझते है शान
हमें फेंक कर दिखाते हो निराशा और क्रोध, करते हो अपमान
जब सीता लक्ष्मण सहित गए वनवास श्रीराम भगवान
भरत ने उनकी खड़ाऊँ सिंहासन पर रखकर चलाया राजकाज, दिया सुशासन
आपके शरीर का सारा भार मैंने किया है धारण
मुझे मत समझो कोई वस्तु साधारण