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दिल-ओ-दिमाग

अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ मसले दिल से हल होते हैं,
        
                                                    
                            
कुछ दिमाग से,
दर्द देते हैं अक्सर दिमाग वाले,
दिलवाले सुकून देते हैं,

हैरान होते हैं हैरत है हमें,
इसी बात की दिन-रात,
दिल के लिए वक्त नहीं रहता
दर्द बस दिमाग को देते हैं,

एक जंग सी छिड़ी रहती है,
दिल-ओ-दिमाग के बीच
वक्त मिलता ही नहीं,
तेरी इबादत के लिए हमें,
दर्द दिल का है पर,
दिमाग काम करते नहीं,
8 घंटे पहले
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