विज्ञापन

अनंत विश्राम

ANURADHA TYAGI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुबह हो गई
        
                                                    
                            
निशा चली गई
सब सोए हैं
प्रकृति जगी है
और उसके साथ मैं ।
चिड़ियों की चहचहाहट
गिलहरी की घुँघरू सी आवाज़
और मंद बहती शीतल बयार
आराम देती है
मेरे तन - मन दोनों को ।
इस समय सब हल्का सा लगता है
दिलो-दिमाग को सुकून मिलता है ।
बिना शोर की ये सुबह
कर देती है
मन को भावविभोर
जाग जाते हैं मेरे मन के विचार
जिनको लिख कर
मन को मिलता
अनंत विश्राम ।
5 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Jagdish Prasad

514 कविताएं

View Profile