विज्ञापन

तुम ललचाते हो दूसरे के बच्चे

Anmol tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम ललचाते हो दूसरे के बच्चे |
        
                                                    
                            
हम ललचाते हैं उनके मां-बाप |
हाय ईश्वर, यह क्यों नहीं होता?
बदल जाएं हम और आप ||

अपनों में कमियां ढूंढें |
दूसरों में विशेषता ही विशेषता |
वक्त आने पर पता चलता है |
कि कौन अपना कौन है विशेष ||

- अनमोल त्रिपाठी 
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Parul Bhaktani

1570 कविताएं

View Profile