तुम ललचाते हो दूसरे के बच्चे |
हम ललचाते हैं उनके मां-बाप |
हाय ईश्वर, यह क्यों नहीं होता?
बदल जाएं हम और आप ||
अपनों में कमियां ढूंढें |
दूसरों में विशेषता ही विशेषता |
वक्त आने पर पता चलता है |
कि कौन अपना कौन है विशेष ||
- अनमोल त्रिपाठी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X