हंसते हंसते फांसी पर जो झूल गए उनको नमन है
देश के लिए भूख प्यास जो भूल गए उनको नमन है
स्वदेश के लिए खाए हंसते हंसते जो गोली
डर कर भागे अंग्रेज,देख जवानों की टोली
याद करो जरा उनकी अमर कुर्बानी को
याद करो जरा झांसी वाली रानी को
बांध पीठ पर बेटे को,चल दी तलवार ताने
कितनी ताकत थी सिर्फ ऊपर वाला जाने।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'