मुझे बस स्वदेश प्यार चाहिए
मुझे नहीं सारा संसार चाहिए
मुझे नहीं भीड़ हजार चाहिए
मुझे नहीं रुपए करोड़ों हजार चाहिए
मुझे नहीं बड़ा बाजार चाहिए
मुझे नहीं पर्वत पठार चाहिए
मुझे तो गंगा की पावन धार चाहिए
मुझे नहीं पुष्प कचनार चाहिए
मुझे तो बस स्वदेश प्यार चाहिए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'