हैं सागर नदी नाले
हैं हम दिल वाले
हैं हम हिंद वाले
हैं हम मतवाले
हैं हम गंगा के किनारे वाले
हैं हम राम के देश वाले
हैं हम श्याम के देश वाले
देश हमारा कभी झुका नहीं
देश हमारा कभी रूका नहीं
अविरल गति से निरंतर हम चलते
हिमालय का दिल लिए रहे हम गलते।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'