गया की धरती जग में न्यारी
गया की धरती सबसे प्यारी
पितृपक्ष मेला में दिखती भीड़ भारी
पिंड दान करने आती दुनिया सारी
बोधगया है सबसे सुंदर
कुछ इमारतें पटना से भी सुंदर
गया हवाई अड्डे की सुंदरता बढ़ जाती है
जब बौद्ध भिक्षुक की टोली यहां आती है
फल्गु नदी के किनारे
आते पिंडदानी ढेर सारे
गया की धरती है प्रसिद्ध विश्व भर में
कभी आईए ना हमारे गया शहर में
साहित्यकार की मंडली जुटती गया शहर में
गया जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन है इसी शहर में
हर शनिवार को जुटते हैं कवि ढेर सारे
लेकर आते कविता,गजल,गीत प्यारे प्यारे
आईए ना कभी हमारे इस शहर में
देखेंगे संचालन सहज का इसी शहर में
सुनेंगे कविता राष्ट्रकवि का इसी शहर में
पसंद आएगा यह शहर एक नजर में
मिल जाएगा तिलकुट,लाई,अनरसा घर-घर में।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'