मन में उठे रोज हिलोर
चल चल गऊंवा की ओर
जहां मिले प्यार के छोर
जहां के लोगवा उठे भोरे भोर
जहां बा गंगा मईया के हिलोर
जहां बा प्यार के बागडोर
चलो चलें गऊंवा की ओर
जहां के माटी में बा प्यार पोरे पोर
जहां बा नैनी जोर
चल चल चल गऊंवा की ओर।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'