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लहज़ा बदल गया

Anita Dasani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            असर है ये किसी की
        
                                                    
                            
नसीहत ओ गुमान का
कि लहजा ही बदल
गया है तेरी ज़ुबान का।

मैं खामोश किसी डर
या खौफ से नही हुआ
पहले से ही कायल नहीं
था तेरी ज़ुबान का


हम तो ख़ामोश रह कर
भी सब जान लेते हैं
कि हुनर आता है हमें
नज़रो की दास्तान का।

बदलते हुए वक़्त का
शिकवा ही क्या करें
फितरत से ही न हो जो
दीन ओ ईमान का

भरम मिट ही जाता है
एक न एक दिन ऐ 'अदा'
अयाँ हो ही जाता है सच
हर इंसान का।
-अनिता दासानी'अदा'
18 घंटे पहले
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