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हरि जी

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम बिन कौन सहाई हरि जी।
        
                                                    
                            
मतलब की जगत मिताई हरि जी।?

कंचन-कामिनी मोह न छोड़े।
मन की अलग ढिंठाई हरि जी।।

खेल लड़कपन प्यार में यौवन।
वृद्धापन आँसू ढरकाई हरि जी।।

काया-कंचन साँसन रतन-धन।
सबने दिया गँवाई हरि जी।।

जब-जब कष्ट कलुस मन घेरे।
आवें याद पिताजी-माई हरि जी।।

कपटी मन की गति हरि जानो
देना पार लगाई हरि जी।।

मीत बने के अनिल हैं अगणित।
बिगड़े नहिं भाई-भउजाई हरि जी।।
-पंडित अनिल
2 महीने पहले
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