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मनुष्य जीवन एक उपहार

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धन्यवाद प्रभु!
        
                                                    
                            
इस जीवन के लिए धन्यवाद,
मनुष्य का जन्म देकर
दिया आपने अनुपम वरदान।
धन्यवाद उस भारतभूमि का,
जहाँ तपस्वियों ने तप किया,
महात्माओं ने ज्ञान बाँटा,
ऋषियों ने सत्य का मार्ग दिखाया।
धन्यवाद उस सनातन संस्कृति का,
जिसने जीवन का अर्थ सिखाया,
कर्म, धर्म और सत्य के पथ पर
चलने का संदेश सुनाया।
धन्यवाद उस परिवार का,
जिसमें जन्म मिला संस्कारों के साथ,
जहाँ ईश्वर का नाम मिला,
और धर्म ने थामा जीवन का हाथ।
धन्यवाद उन लोगों का भी,
जिनके बीच भेजा हे भगवान,
जो सुख-दुःख में साथ खड़े हैं,
जो बनते जीवन की पहचान।
धन्यवाद इस स्वस्थ शरीर का,
नाक, कान, मुख, हाथ और पैर,
आँखों से सुंदर जग देखा,
कानों से सुने ज्ञान के स्वर।
बुद्धि दी ऐसी हे दाता,
सही-गलत को समझ सकूँ,
अपने कर्मों को शुद्ध बनाकर
जीवन को सार्थक कर सकूँ।
न धन माँगूँ, न यश माँगूँ,
बस इतनी कृपा बनाए रखना—
जब तक साँसें चलती रहें,
मुझसे शुभ कर्म कराते रहना।
किसी दुखी के आँसू पोंछूँ,
किसी निराश को आशा दूँ,
सेवा, सत्य और प्रेम की राह पर
हर दिन अपना जीवन साधूँ।
यह जीवन केवल भोग नहीं है,
यह प्रभु की दी हुई साधना है,
हर श्वास में आपका स्मरण हो,
हर कर्म में आपकी भावना है।
जब जीवन की संध्या आए,
मन में कोई पश्चाताप न हो,
कर्मों की गठरी हल्की हो
और हृदय में कोई संताप न हो।
हे प्रभु! ऐसी बुद्धि देना,
मोह-माया से ऊपर उठ जाऊँ,
सत्कर्मों की ज्योति जलाकर
अपने भीतर आपको पाऊँ।
जन्म-मरण के इस चक्र से
जब आपकी कृपा से पार हो जाऊँ,
अहंकार मिटे, आत्मज्ञान मिले,
और अंततः आपमें ही विलीन हो जाऊँ।
हे प्रभु!
जो कुछ मिला, आपका दिया है,
जो कुछ हूँ, आपकी कृपा है।
बस अंतिम प्रार्थना इतनी—
मेरी हर साँस आपकी भक्ति बने,
हर कर्म मानवता की सेवा बने,
और मेरा जीवन
आपके चरणों में समर्पित हो जाए।
ॐ नमः शिवाय। 
हरि ॐ तत्सत।
12 घंटे पहले
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