उम्र भर बस इतनी ही दौलत कमाऊंगा,
मां-बाप खुश रहें कुछ ऐसा कर जाऊंगा ,
तुम्हें जरूरत हो तो तुम चले आना ,
मैं तुम्हें हरगिज़ नहीं बुलाऊंगा ।
मैं उम्र भर बस इतनी ही दौलत कमाऊँगा...
ये महलों की तकमील उसके पसीने से है ,
भला उसकी मेहनत को मैं कैसे भूल पाऊंगा ,
खुदा मांगे फेहरिस्त चंद जांबाजों कि ,
मैं उसका नाम तो लूंगा फिर सिर्फ आंसू बहाऊंगा।
मैं उम्र भर बस इतनी ही दौलत कमाऊँगा...
उस माँ ने अपना बेटा भेजा है जंग में,
मैं तो बस उसके लिए दुआ ही कर पाऊंगा,
तलवार ना सही कलम से ही लड़ जाऊंगा ,
वो जंग जीत जाएगा और मैं खुश हो जाऊंगा ।
मैं उम्र भर बस इतनी ही दौलत कमाउँगा...
सियासत बनाए बिगाड़े उसका ईमान जाने,
मैं हुक्मरानों को ही दोषी ठहराउँगा ,
सत्ता वह पाए तुम पावो हम से क्या मतलब ,
लेकिन गलत करोगे तो विरोध में लिख जाऊंगा।
उम्र भर बस इतनी ही दौलत कमाऊँगा..
विरासत में पुरुखों से जो शोहरत मिली है मुझे,
मैं उसकी रजभर ना अदा कर पाऊंगा ,
मेरे पितामह से बसर जो भी मिला अब तक,
कहा मैं उन्हें फिर मिलना चाहूंगा,
चलना, बोलना, बातों में जोश भरना ये तो लहज़े हैं उनके,
ज़बान ही तो है दे दी मैंने, उनकी ये रघुकुल रीत मैं भी दोहराऊंगा।
हाँ उम्र भर बस इतनी ही दौलत कमाऊंगा.
माँ -बाप खुश रहें कुछ ऐसा कर जाऊंगा....
उम्र......
तकमील - पूर्णता
हुक्मरान-शाशक "हुक्मी"
फ़ेहरिस्त-सूची
बशर - आदमी
"आलोक यादव"
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