धरिणी एक टक देख रही, कब वारिद दिख जाय।
उमड़ घुमड़ वारिद दिखे , धरा मगन हुइ जाय।।
दामिनि दमक मेघ कड़क , जल से धरा नहाय।
पुलकित हुई धरणी अब , मन तृप्त हुइ जाय।।
- अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर , कानपुर
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