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प्रकृति वर्णन

                
                                                         
                            धरिणी एक टक देख रही, कब वारिद दिख जाय।
                                                                 
                            
उमड़ घुमड़ वारिद दिखे , धरा मगन हुइ जाय।।

दामिनि दमक मेघ कड़क , जल से धरा नहाय।
पुलकित हुई धरणी अब , मन तृप्त हुइ जाय।।

- अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर , कानपुर

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7 वर्ष पहले

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