जिंदगी की कहानी में अपने ही गद्दार निकले
हर शख्स विलेन निकला।
हमारी ही बर्बादी की सुरंग हमारे साथ रहकर
ही खोद रहा था।
वो लोग जिंदगी के हर बड़े और आवश्यक मुद्दे
में गायब रहे।
कहीं कुछ अच्छा ना हो जाए इसलिए मुंह फेर
लिए।
अपने काम काज में वह मीठे बनकर हमसे
फायदा ले गये।
और पीठ पीछे खूब सारे भेद ले गये और
धोखा दे गये।
ये कोई दूर के रिश्ते की नहीं बिल्कुल खास
की है बात।
बाहरी पर एकबार फिर से विश्वास पर अपनों
से मिलता भर भर कर विश्वास घात।
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