वादा करो
अगर हाथ थामा है
तो ता उम्र हाथ न छोड़ोगे
बीच राह में तो
न छोड़ के जाआेगे
ख़ुशी में तो सभी
साथ देते है
वादा करो
गम में भी साथ निभाआेगे
अमिता श्रीवातव
हमें विश्...और पढ़ें
मां को अपनी पुकार सुनाएंगे
जयकारा खूब लगाएंगे
घंटा,शंख,घड़ियाल बजाएंगे
मां को अपनी आज मनाएंगे।
झोली सबकी मां भरती है
बेटों के दुख मां हरती है
मां को अपनी आज रिझाएंगे
भोग,प्रसाद,नैवेद्य चढ़ाएंगे।।
...और पढ़ें
आँख खोलू तो चेहरा मेरी माँ का हो
आँख बंद हो तो सपना मेरी माँ का हो
मैं मर भी जाऊं तो भी कोई गम नहीं
लेकिन कफ़न मिले तो आंचल मेरी माँ का हो!!
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित हो...और पढ़ें
मेरी आदर्श "माँ"
वह अटल है, वह सकल है,
वह अजर है, वह अमर है,
वह अगन है, वह तपन है,
वह लगन है, वह भजन है।
इन चक्षुओं का मीत है,
वह आत्मा का गीत है,
वह हर पवन का राग है,
वह त्याग ह...और पढ़ें
जब तक साथ है हर गुस्ताखी कर लो
रूठो मनाओ माफी कर लो
मेरे प्यार के सागर से अपना ये पल्लू भर लो
मेरे खुशी का वस्ता ना सही अपने अरमानों को पूरा कर लो
अभी है मेरा साया साथ खेलो अम्बर को धर लो
अभी है तुम पर मरने वाला चाह...और पढ़ें
मेरी ज़िन्दगी का वो चार मिश्रा बन कर रह गई
जब भी उसकी याद आयी अश्क़ों में मिल कर बह गई
हम उसको याद करते रहे वो याद बन कर रह गई
जब भी तेरा दीदार हुआ मेरी सांस थम के रह गई
मेरी वफ़ा को तू भी बेवफा कह गई
कर के याद तुझे...और पढ़ें
बेरूखी में अपनी इंसान क्यों मुझे भूल जाते हो तुम
यूंही बेकार समझकर सड़कों के किनारे फेंक जाते हो तुम
जब आता है मौसम सर्द हवा का तो यहां-वहां से उढ़ाकर
ले आते हो तुम...लगती है ठंडी तो मुझे जलाजाते हो तुम
क्यों अपनी बेरूखी मऔर पढ़ें
देश मेरा बढ़ रहा
देश मेरा बढ़ रहा
प्रगति सीढ़ी चढ़ रहा
देश के उत्थान में सब
साथ मिल अब चल रहे हैं
खून से सींचा जिसे था
हर सुमन अब खिल रहे हैं
कंटकों को आज देखो
स्वयं ही वह जल रहा है
देश मेरा...और पढ़ें
बेच रही एक नार काँच की चूड़ियाँ
देख रही लालायित हो कर
कब आये कोई बहू बेटियां
हो अमर सुहाग अखंड रहे चूड़ियाँ
छिपा रही है वो अपनी मजबूरियाँ
बेच रही एक नार काँच की चूड़ियाँ
देखो आज ह...और पढ़ें
हर रोज़ की तरह आज भी मैं, अपने पसन्दीदा कैफ़े में कोनें की कुर्सी पकड़ कर उसका इंतज़ार कर रहा था।
आज उसे आने में ज़रा देर जरूर हुई , पर अब, अब वो मेरे आंखों के ठीक सामने थी।
मैं उसे देखकर बस मन ही मन खुश होता रहा।...और पढ़ें