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बेच रही एक नार कांच की चूड़ियां

Bech rhi ek nar kanch ki chudiyan
                
                                                         
                            बेच रही एक नार काँच की चूड़ियाँ
                                                                 
                            

देख रही लालायित हो कर
कब आये कोई बहू बेटियां

हो अमर सुहाग अखंड रहे चूड़ियाँ
छिपा रही है वो अपनी मजबूरियाँ

बेच रही एक नार काँच की चूड़ियाँ

देखो आज है सुँदर सा अवसर
रहेगा तुम दोनों का प्रेम परस्पर

ले जाओगी जो आज चूड़ियाँ
कम हो जाएँगी प्रेमी से दूरियाँ

बैच रही एक नार काँच की चूड़ियाँ

पॉवडर लिपस्टिक तेल अत्र है
नेल पेंट और शीशा हुजूर हैं

सजा लो अपने नव यौवन को
निखार लो अपने रूप उज्ज्वल को

अलता पाँव सजाना सखी री
मेहँदी हाथ में लगाना प्यार की

गोंद भर जाएंगी तुम्हारी
ये ही दुआ है दिल से हमारी।

आस लगाये देखे इत ऊत
मिले कुछ दाम आज उच्च

बेच रही एक नार काँच की चुड़ियाँ

-संध्या चतुर्वेदी,
  मथुरा 

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8 वर्ष पहले

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