मां को अपनी पुकार सुनाएंगे
जयकारा खूब लगाएंगे
घंटा,शंख,घड़ियाल बजाएंगे
मां को अपनी आज मनाएंगे।
झोली सबकी मां भरती है
बेटों के दुख मां हरती है
मां को अपनी आज रिझाएंगे
भोग,प्रसाद,नैवेद्य चढ़ाएंगे।।
गीतेश अग्निहोत्री, कानपुर देहात
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