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Kiss Day - 'बोसे' पर कहे गए शायरों के अल्फ़ाज़

दीपाली अग्रवाल

Urdu Adab Kavya Charcha
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एक बोसे के तलबगार हैं हम
और मांगें तो गुनहगार हैं हम
- अज्ञात


ध्यान के रस में डूबे लब
बोसा बोसा चेहरे हैं
- मुसहफ़ इक़बाल तौसिफ़ी

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एक बोसे पे बेचते थे हम
तू ने सौदा न कुछ किया दिल का
- आसिफ़ुद्दौला


बस एक बोसा-ए-सुब्ह और एक बोसा-ए-शाम!
फ़क़ीर-ए-बोसा हूं और इल्तिजा-ए-बोसा है
- सय्यद काशिफ़ रज़ा

बोसा दीजेगा गले लग लग कर
ज़्यादा और मुझ को न बकवाइएगा
- क़ासिम अली ख़ान अफ़रीदी


खाई है इक नई मिठाई आज
बोसा पाया है यार के लब का
- सख़ी लख़नवी

मांगते ही गुनाहगार हुए
उस से बोसा लिया दिया किस ने
- गोया फ़क़ीर मोहम्मद


मिरे ख़्वाबों के रुख़्सारों पे अब तक
किसी बोसे का नम ठहरा हुआ है
- सरफ़राज़ ज़ाहिद

नूर ये उस आख़िरी बोसे का है
चांद सा क्या तेरी पेशानी में है
- शहरयार


एक बोसा ही दिया था रात ने
चांद तू तो रात ही का हो गया
- प्रखर मालवीय कान्हा

3 वर्ष पहले
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