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सुदर्शन फ़ाकिर: वक़्त रुकता नही किसी के लिए

sudarshan faakir famous ghazal na mohabbat na dosti ke liye
                
                                                         
                            


ना मोहब्बत ना दोस्ती के लिए
वक़्त रुकता नही किसी के लिए

दिल को अपने सज़ा ना दे यूँही
इस ज़माने की बेरुखी के लिए

कल जवानी का हश्र क्या होगा
सोच ले आज दो घड़ी के लिए

हर कोई प्यार ढूँढ़ता है यहाँ
अपनी तनहा सी ज़िंदगी के लिए

वक़्त के साथ साथ चलता रहे
यही बेहतर है आदमी के लिए 
 

एक घंटा पहले

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