Urdu Poetry: अब किसी तरह दिल नहीं लगता

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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अब किसी तरह दिल नहीं लगता
घर में सब कुछ तो है सिवा घर के
- पूजा भाटिया  

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एक चराग़ हूँ मिट्टी का
दूर-दराज़ अंधेरे में
- जमाल एहसानी

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अब नहीं लौट के आने वाला
घर खुला छोड़ के जाने वाला
- अख़्तर नज़्मी

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कभी कभी तो ये दिल में सवाल उठता है
कि इस जुदाई में क्या उस ने पा लिया होगा
- अनवार अंजुम

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अब तो उन की याद भी आती नहीं
कितनी तन्हा हो गईं तन्हाइयाँ
- फ़िराक़ गोरखपुरी

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मुसाफ़िर ही मुसाफ़िर हर तरफ़ हैं
मगर हर शख़्स तन्हा जा रहा है
- अहमद नदीम क़ासमी

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Urdu Poetry: वो सो गया है मुझे ख़्वाब से जगाते हुए

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