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'मुस्कुराहटों' पर कहे गए शेर...

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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                                                  तुम हँसो तो दिन निकले चुप रहो तो रातें हैं 
किस का ग़म कहाँ का ग़म सब फ़ुज़ूल बातें हैं 
- अज्ञात

ज़रा इक तबस्सुम की तकलीफ़ करना 
कि गुलज़ार में फूल मुरझा रहे हैं 
- अब्दुल हमीद अदम

मुस्कुराहट है हुस्न का ज़ेवर 
मुस्कुराना न भूल जाया करो 
- अब्दुल हमीद अदम
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हँसी थमी है इन आँखों में यूँ नमी की तरह 
चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह 
- मीना कुमारी नाज़

बुझ गई शम्अ की लौ तेरे दुपट्टे से तो क्या 
अपनी मुस्कान से महफ़िल को मुनव्वर कर दे 
- सदा अम्बालवी

यूँ मुस्कुराए जान सी कलियों में पड़ गई 
यूँ लब-कुशा हुए कि गुलिस्ताँ बना दिया 
- असग़र गोंडवी

मुस्कुराने का यही अंदाज़ था 
जब कली चटकी तो वो याद आ गया 
- अज्ञात

'नज़ीर' लोग तो चेहरे बदलते रहते हैं
तू इतना सादा न बन मुस्कुराहटें पहचान
- नज़ीर तबस्सुम

सुनूँ अपनी साँसों में आहट तुम्हारी
कहाँ जा छुपी मुस्कुराहट तुम्हारी
- क़तील शिफ़ाई

तुम्हारी मुस्कुराहट क्या हुई थी
हमारा गुनगुनाना चल रहा है
- सुधीर बमोला

यूँ फूट रही है मुस्कुराहट की किरन
मंदिर में चराग़ झिलमिलाए जैसे
- फ़िराक़ गोरखपुरी

मिरे हबीब मिरी मुस्कुराहटों पे न जा
ख़ुदा-गवाह मुझे आज भी तिरा ग़म है
- अहमद राही

ये मुस्कुराहट का एक पर्दा सा गर हटा कर
'कबीर' देखो तो सब के अंदर हैं एक जैसे
- इनाम कबीर

तुम्हारे होंटों पर आने वाली मुस्कुराहट
हमारी आँखों से इत्तिफ़ाक़ी मुलाक़ात कर ले
- सय्यद काशिफ़ रज़ा

आप ने इक निगाह में सब को निहाल कर दिया
फूल को मुस्कुराहटें मौज को बेकली भी दी
- माहिर-उल क़ादरी

नमी सी आँख में और होंट भी भीगे हुए से हैं
ये भीगा-पन ही देखो मुस्कुराहट होती जाती है
- मीना कुमारी नाज़

मुस्कुराहट की भी आख़िर असलियत खुल ही गई
ग़म ज़माने से छुपाने का मज़ा जाता रहा
- सुबोध लाल साक़ी

छुपा छुपा सा फिरा दर्द मुस्कुराहट में
जो साथ थे उन्हें पहचान में नहीं आया
- बिमल कृष्ण अश्क
6 वर्ष पहले
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