तुम हँसो तो दिन निकले चुप रहो तो रातें हैं
किस का ग़म कहाँ का ग़म सब फ़ुज़ूल बातें हैं
- अज्ञात
ज़रा इक तबस्सुम की तकलीफ़ करना
कि गुलज़ार में फूल मुरझा रहे हैं
- अब्दुल हमीद अदम
मुस्कुराहट है हुस्न का ज़ेवर
मुस्कुराना न भूल जाया करो
- अब्दुल हमीद अदम
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हँसी थमी है इन आँखों में यूँ नमी की तरह
चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह
- मीना कुमारी नाज़
बुझ गई शम्अ की लौ तेरे दुपट्टे से तो क्या
अपनी मुस्कान से महफ़िल को मुनव्वर कर दे
- सदा अम्बालवी
यूँ मुस्कुराए जान सी कलियों में पड़ गई
यूँ लब-कुशा हुए कि गुलिस्ताँ बना दिया
- असग़र गोंडवी
मुस्कुराने का यही अंदाज़ था
जब कली चटकी तो वो याद आ गया
- अज्ञात
'नज़ीर' लोग तो चेहरे बदलते रहते हैं
तू इतना सादा न बन मुस्कुराहटें पहचान
- नज़ीर तबस्सुम
सुनूँ अपनी साँसों में आहट तुम्हारी
कहाँ जा छुपी मुस्कुराहट तुम्हारी
- क़तील शिफ़ाई
तुम्हारी मुस्कुराहट क्या हुई थी
हमारा गुनगुनाना चल रहा है
- सुधीर बमोला
यूँ फूट रही है मुस्कुराहट की किरन
मंदिर में चराग़ झिलमिलाए जैसे
- फ़िराक़ गोरखपुरी
मिरे हबीब मिरी मुस्कुराहटों पे न जा
ख़ुदा-गवाह मुझे आज भी तिरा ग़म है
- अहमद राही
ये मुस्कुराहट का एक पर्दा सा गर हटा कर
'कबीर' देखो तो सब के अंदर हैं एक जैसे
- इनाम कबीर
तुम्हारे होंटों पर आने वाली मुस्कुराहट
हमारी आँखों से इत्तिफ़ाक़ी मुलाक़ात कर ले
- सय्यद काशिफ़ रज़ा
आप ने इक निगाह में सब को निहाल कर दिया
फूल को मुस्कुराहटें मौज को बेकली भी दी
- माहिर-उल क़ादरी
नमी सी आँख में और होंट भी भीगे हुए से हैं
ये भीगा-पन ही देखो मुस्कुराहट होती जाती है
- मीना कुमारी नाज़
मुस्कुराहट की भी आख़िर असलियत खुल ही गई
ग़म ज़माने से छुपाने का मज़ा जाता रहा
- सुबोध लाल साक़ी
छुपा छुपा सा फिरा दर्द मुस्कुराहट में
जो साथ थे उन्हें पहचान में नहीं आया
- बिमल कृष्ण अश्क