विज्ञापन

महबूबा के whatsapp पर मिले ख़त पर कैसे होते शायरों के अल्फ़ाज़

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  

ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है
- फ़ानी बदायूंनी


काफ़ी है मिरे दिल की तसल्ली को यही बात
आप आ न सके आप का पैग़ाम तो आया
- शकील बदायूंनी

विज्ञापन

क्या क्या फ़रेब दिल को दिए इज़्तिराब में
उन की तरफ़ से आप लिखे ख़त जवाब में
- अज्ञात


ख़त लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के
- मिर्ज़ा ग़ालिब

मिट चले मेरी उमीदों की तरह हर्फ़ मगर
आज तक तेरे ख़तों से तिरी ख़ुशबू न गई
- अख़्तर शीरानी


तिरा ख़त आने से दिल को मेरे आराम क्या होगा
ख़ुदा जाने कि इस आग़ाज़ का अंजाम क्या होगा
- मोहम्मद रफ़ी सौदा

ग़ुस्से में बरहमी में ग़ज़ब में इताब में
ख़ुद आ गए हैं वो मिरे ख़त के जवाब में
- दिवाकर राही


पहली बार वो ख़त लिक्खा था
जिस का जवाब भी आ सकता था
- शारिक़ कैफ़ी

मज़मून सूझते हैं हज़ारों नए नए
क़ासिद ये ख़त नहीं मिरे ग़म की किताब है
- निज़ाम रामपुरी


मेरा ही ख़त उस शोख़ ने भेजा मिरे आगे
आख़िर जो लिखा था वही आया मिरे आगे
- लाला माधव राम जौहर

6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all