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हसरत जयपुरी के चुनिंदा शेर

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूं नहीं देते
ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूं नहीं देते


किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम
मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूं तो मिटा क्यूं नहीं देते

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ये कौन आ गई दिल-रुबा महकी महकी
फ़ज़ा महकी महकी हवा महकी महकी


वो आंखों में काजल वो बालों में गजरा
हथेली पे उस के हिना महकी महकी 

हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं
वो ग़ैर की बांहों में आराम से सोते हैं


होता चला आया है बे-दर्द ज़माने में
सच्चाई की राहों में कांटे सभी बोते हैं 

शो'ला ही सही आग लगाने के लिए आ
फिर नूर के मंज़र को दिखाने के लिए आ


दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे
हर रस्म-ए-मोहब्बत को मिटाने के लिए आ

मैं उस की आंखों से छलकी शराब पीता हूं
ग़रीब हो के भी महंगी शराब पीता हूं


उसे भी देखूं तो पहचानने में देर लगे
कभी कभी तो मैं इतनी शराब पीता हूं

5 वर्ष पहले
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