जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूं नहीं देते
ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूं नहीं देते
किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम
मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूं तो मिटा क्यूं नहीं देते
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X