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मोहब्बत: दिल की कैफ़ियत बयां कर रहे हैं ये 21 शेर

काव्य डेस्क

Irshaad
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                                                  आख़री हिचकी तिरे ज़ानूं पे आए
मौत भी मैं शाइराना चाहता हूं
क़तील शिफ़ाई

अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जाएगा
तुम्हें जिस ने दिल से भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो
बशीर बद्र

अभी ज़िंदा हूं लेकिन सोचता रहता हूं ख़ल्वत में
कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैं ने
साहिर लुधियानवी
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अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो...

अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो
तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो
मुनव्वर राना

अभी आए अभी जाते हो जल्दी क्या है दम ले लो
न छोड़ूंगा मैं जैसी चाहे तुम मुझ से क़सम ले लो
अमीर मीनाई

आग़ाज़-ए-मोहब्बत का अंजाम बस इतना है
जब दिल में तमन्ना थी अब दिल ही तमन्ना है
जिगर मुरादाबादी

अजीब रात थी कल तुम भी आ के लौट गए...

अजीब रात थी कल तुम भी आ के लौट गए
जब आ गए थे तो पल भर ठहर गए होते
बशीर बद्र

वो लोग बड़े खुशकिश्मत थे जो इश्क को काम समझते थे
हम जीते जी मशरुफ रहे, कुछ इश्क किया कुछ काम किया
फैज अहमद फैज 

चल साथ कि हसरत दिल-ए-मरहूम से निकले
आशिक़ का जनाज़ा है ज़रा धूम से निकले
मिर्ज़ा मोहम्मद अली फ़िदवी

अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं...

अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं
तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी
साहिर लुधियानवी

इक खिलौना टूट जाएगा नया मिल जाएगा
मैं नहीं तो कोई तुझ को दूसरा मिल जाएगा
अदीम हाशमी

इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर आ सको तो आओ
मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशां नहीं है
मुस्तफ़ा ज़ैदी

इक़रार है कि दिल से तुम्हें चाहते हैं हम...

इक़रार है कि दिल से तुम्हें चाहते हैं हम
कुछ इस गुनाह की भी सज़ा है तुम्हारे पास
हसरत मोहानी

तुम मुखातिब भी हो करीब भी हो
तुमको देखें कि तुमसे बात करें 
फिराक गोरखपुरी

प्यार के बारे में इतना नहीं सोचा जाता
उससे कह दो कि मेरी आंखों का सफर खत्म करे
वसीम बरेलवी

आपको मैंने निगाहों में बसा रखा है...

आपको मैंने निगाहों में बसा रखा है 
आईना छोड़िए, आईने में क्या रखा है
हिना तैमूरी

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो 
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए
बशीर बद्र

जान देना किसी पे लाजिम है 
यों जिंदगी की बसर नहीं होती
अज्ञात

दिल वो नगर नहीं कि फिर आबाद हो सके...

दिल वो नगर नहीं कि फिर आबाद हो सके
पछताओगे, सुनो ये बस्ती उजाड़ कर
मीर

सोचता रहता हूं इर्साल करुं या न करुं 
एक खत कब से तेरे नाम लिखा रखा है
हिना तैमूरी
 
8 वर्ष पहले
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