साइबर गुंडई पर अब लगेगी लगाम, सटीक तरीके से हो सकेगी ऐसे अकाउंट्स की पहचान

संदीप  भट्ट
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्कसंदीप भट्ट
Wed, 18 Sep 2019 03:23 AM IST
सार

ट्विटर पर आक्रामक भाषा, अपशब्द व अपमानजनक व्यवहार की पहचान करेगा एल्गोरिदम

New algorithm to identify cyber-bullies on Twitter

    विस्तार

    ट्विटर जैसी सोशल मीडिया साइट पर साइबर गुंडई पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है। बिंघमटन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी आकलन पद्धति (एल्गोरिदम) विकसित करने का दावा किया है जिसके जरिये ट्विटर पर आक्रामक भाषा, अपशब्द और अपमानजनक व्यवहार करने वालों की प्रभावी पहचान हो सकेगी।

    इसके जरिये 90 फीसदी सटीक तरीके से ऐसे अकाउंट्स की पहचान की जा सकेगी। मशीन लर्निंग पर आधारित यह तकनीक पूर्व में पेश आए अनुभवों के आधार पर काम करती है।

    विश्वविद्यालय के कंप्यूटर वैज्ञानिक जेरेमी ब्लैकबर्न ने बताया कि अपमानजनक व्यवहार करने वाले ट्विटर उपयोगकर्ताओं के विश्लेषण के आधार पर इस एल्गोरिदम को विकसित किया गया है। उनमें और बाकी उपयोगकर्ताओं के फर्क को समझा गया।

    ब्लैकबर्न ने बताया कि इसके लिए कुछ क्रॉलर (इंटरनेट पर मौजूद सामग्री का खुद विश्लेषण करने वाले) प्रोग्राम बनाए गए। इसी प्रोग्राम ने ट्वीट, प्रोफाइल, कौन किसे फॉलो करता है तथा उसके कंमेंट की भाषा आदि का डाटा जमा किया। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की सामान्य भाषा और भावनाओं का भी विश्लेषण किया गया। ट्विटर यूजर्स के आपसी संबंधों को भी महत्व दिया गया।

    दो तरह का खराब व्यवहार

    इस अध्ययन में पता चला कि ट्विटर पर खराब व्यवहार दो तरीके से हो रहा है। एक भाषाई धौंस जमाना और दूसरा आक्रामक और अपमानजनक भाषा का प्रयोग है। ऐसा व्यवहार करने वाले उपयोगकर्ताओं को नए एल्गोरिदम ने सफलता से पहचान लिया। ऐसे लोग सोशल मीडिया पर दूसरों को परेशान कर रहे थे, हिंसा या जान से मारने की धमकी दे रहे थे और नस्लीय टिप्पणियां भी की।

    अध्ययन से खुद सीखा

    इस एल्गोरिदम ने दो खराब व्यवहार की पहचान के लक्षण खुद तय किए। ऐसा करके यह धौंस जमाने वालों और अन्य उपयोगकर्ताओं में फर्क करने में सक्षम हुआ। ब्लैकबर्न के अनुसार यह एल्गोरिदम साइबर दुनिया में समस्या बने लोगों की पहचान कर ट्विटर और ऐसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आगाह कर सकता है। इस आधार पर संदिग्ध लोगों के अकाउंट डिलीट किए जा सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार सोशल मीडिया पर लोगों के आक्रामक व्यवहार को रोकने के लिए बहुत कम काम हुआ है। दरअसल, मानव व्यवहार को समझना मुश्किल है। खासतौर से जब इसे शब्दों और आलोचना में व्यक्त किया जाए।