Betting Apps: ऑनलाइन सट्टेबाजी एप्स पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; RBI, Google, Dream11 समेत कई संस्थाओं से मांगा जवाब

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Fri, 01 Aug 2025 02:10 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी एप्स पर सख्त नियमन की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा कई बड़ी एजेंसियों और कंपनियों से भी जवाब मांगा गया है।

supreme court notice on betting apps on pil response rbi google dream11
कोर्ट-सांकतिक तस्वीर - फोटो : ANI

    विस्तार

    ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग एप्स की बढ़ती पहुंच और उनके दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने इस मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है कि इस पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

    इस याचिका में मांग की गई है कि देशभर में ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी एप्स पर सख्त नियमन लागू किया जाए ताकि इससे होने वाले मानसिक और आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

    इन एजेंसियों और कंपनियों से भी मांगा जवाब

    सिर्फ राज्य सरकारें ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कई अहम केंद्रीय एजेंसियों और कंपनियों को भी पक्षकार बनाते हुए जवाब तलब किया है। कोर्ट ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI),प्रवर्तन निदेशालय (ED), गूगल इंडिया, एपल इंडिया, TRAI (दूरसंचार नियामक प्राधिकरण), ड्रीम 11 फैंटसी स्पोर्ट, मोबाइल प्रीमियर लीग (MPL) और A23 गेम्स से जवाब मांगा है।

    कोर्ट ने पूछा है कि इन कंपनियों और एजेंसियों ने सट्टेबाज़ी या रियल मनी गेमिंग से जुड़े कंटेंट को लेकर अब तक क्या दिशा-निर्देश अपनाए हैं और किस हद तक इसे कंट्रोल किया गया है।

    सट्टेबाजी एप्स पर क्यों उठे सवाल?

    हाल के वर्षों में सट्टेबाजी और फैंटेसी गेमिंग एप्स जैसे Dream11, MPL और A23 की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। इनमें 'रियल मनी' का लेन-देन होता है, जो कई बार जुए जैसी आदतों को बढ़ावा देता है। कई राज्यों ने पहले ही ऐसे एप्स को प्रतिबंधित करने की कोशिश की है, लेकिन अब इस पर एकसमान राष्ट्रीय नीति की जरूरत महसूस की जा रही है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस नोटिस को एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पर सख्ती के संकेत मिलते हैं।