Ban: पेटेंट उल्लंघन मामले में जर्मनी की क्षेत्रीय अदालत का बड़ा फैसला, आसुस और एसर लैपटॉप बिक्री पर लगाई रोक
Germany Bans Acer and ASUS Laptop:
जर्मनी की म्यूनिख 1 क्षेत्रीय अदालत ने नोकिया के पक्ष में आए पेटेंट उल्लंघन मामले में एसर और आसुस को देश में अपने लैपटॉप और डेस्कटॉप पीसी की सीधी बिक्री अस्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया है। यह विवाद H.265 (HEVC) वीडियो कोडिंग से जुड़े स्टैंडर्ड-एसेंशियल पेटेंट्स को लेकर है।

विस्तार
जर्मनी की एक अदालत ने टेक कंपनियों एसर (Acer) और (आसुस) ASUS के लिए एक बहुत ही कड़ा फैसला सुनाया है। देश की अदालत ने कंपनियों को अपने लैपटॉप और डेस्कटॉप पीसी की सीधी बिक्री को अस्थायी रूप से रोकने के आदेश दिए हैं। यह फैसला नोकिया (Nokia) के पक्ष में आए पेटेंट उल्लंघन मामले के बाद लिया गया है। 22 जनवरी को म्यूनिख 1 रीजनल कोर्ट ने यह आदेश जारी किया। इसके चलते दोनों कंपनियों को अपनी जर्मन वेबसाइट से संबंधित प्रोडक्ट्स हटाने पड़े हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद नोकिया के H.265 वीडियो कोडिंग (HEVC) से जुड़े स्टैंडर्ड-एसेंशियल पेटेंट्स को लेकर है। अदालत ने पाया कि एसर और आसुस ने FRAND (फेयर, रीजनेबल और नॉन-डिस्क्रिमिनेटरी) शर्तों के तहत लाइसेंस लेने के लिए तैयार नहीं थीं। इसी कारण नोकिया को अदालत से इन कंपनियों के खिलाफ बिक्री रोकने का आदेश मिल गया।
नोकिया का H.265 पेटेंट क्या हैं और कंपनी ने क्या कहा?
नोकिया के पास वीडियो से जुड़ी कई जरूरी तकनीकों के पेटेंट हैं। इनमें H.264, H.265 (HEVC) और H.266 (VVC) जैसे वीडियो कोडेक्स शामिल हैं। ये तकनीकें वीडियो का साइज कम करने, उसे सही तरीके से चलाने और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।
नोकिया का कहना है कि उसकी तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए कंपनियों को उचित शुल्क देना चाहिए। कंपनी को उम्मीद है कि एसर, आसुस और हिसेंस भी दूसरी कंपनियों की तरह लाइसेंस समझौता कर लेंगे। नोकिया ने यह भी कहा कि वह इस मामले में बातचीत के लिए हमेशा तैयार है। रिपोर्ट के अनुसार, हिसेंस ने जनवरी 2026 की शुरुआत में नोकिया से लाइसेंस लेकर इस तरह की बिक्री रोक से खुद को बचा लिया है।