काम की बात: ₹50 और ₹1000 की चार्जिंग केबल में क्या अंतर? यदि आप भी हैं स्मार्ट तो नहीं करेंगे ये गलती

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Fri, 14 Aug 2026 04:51 PM IST
सार

बाजार में 50 रुपये से लेकर 1000 रुपये या उससे ज्यादा कीमत वाली चार्जिंग केबल आसानी से मिल जाती हैं। देखने में दोनों एक जैसी लग सकती हैं, लेकिन चार्जिंग स्पीड, डेटा ट्रांसफर, सुरक्षा और बिल्ड क्वालिटी के मामले में इनमें बड़ा अंतर हो है।

difference between 50 and 1000 rupees charging cable
Type C चार्जिंग केबल - फोटो : AI

    आजकल स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुके हैं, जिन पर हम खुशी-खुशी दसियों हजार रुपये खर्च कर देते हैं। लेकिन जब बात फोन को चार्ज करने की आती है, तो अक्सर हम सड़क किनारे या लोकल दुकानों पर लटकती 50 या 100 रुपये वाली सस्ती चार्जिंग केबल खरीदकर पैसे बचाने की कोशिश करते हैं।

    चार्जिंग केबल
    चार्जिंग केबल - फोटो : Adobe Stock

    बाजार में एक तरफ 50 रुपये की केबल है और दूसरी तरफ 1000 रुपये या उससे अधिक कीमत वाले ओरिजिनल ब्रांड्स। ऐसे में यह सवाल उठना बेहद लाजमी है कि देखने में बिल्कुल एक जैसी लगने वाली इन तारों की कीमत में इतना भारी अंतर क्यों होता है, और क्या सच में महंगी केबल पर पैसे खर्च करना समझदारी है?

    सस्ते केबल जल्दी खराब होते हैं
    सस्ते केबल जल्दी खराब होते हैं - फोटो : Adobe Stock

    इन दोनों केबल्स के बीच सबसे बड़ा और बुनियादी अंतर इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता का होता है। 1000 रुपये या किसी अच्छे ब्रांड की महंगी केबल के अंदर उच्च गुणवत्ता वाले मोटे तांबे (कॉपर) के तारों का सघन जाल बिछा होता है। बाहरी झटकों और मुड़ने से बचाने के लिए इनमें एल्युमिनियम फॉयल की मजबूत शील्डिंग और बाहर से ब्रेडेड नायलॉन या केलर की सख्त कोटिंग दी जाती है।

    वहीं दूसरी तरफ, 50 रुपये वाली सस्ती केबल में बहुत ही पतले और हल्की क्वालिटी के एल्युमिनियम या मिलावटी तार होते हैं, जिन पर साधारण प्लास्टिक चढ़ा होता है। यही वजह है कि सस्ती केबल कुछ ही हफ्तों में चार्जिंग पिन के पास से कट या छिल जाती है।

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