फैक्ट्री रीसेट करने ने नहीं मिटता पूरा डेटा: 69% भारतीय पुराना स्मार्टफोन बेचने से कतरा रहे, डेटा लीक का है डर
भारत में पुराने स्मार्टफोन बेचने का चलन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता भी गहराती जा रही है। एक नए सर्वे में सामने आया है कि अधिकांश लोग निजी जानकारी के दुरुपयोग से डरते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ फैक्ट्री रीसेट करना आपके डेटा को पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाता।

अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं तो पुराने हैंडसेट को बेचकर नया खरीदने के बारे में जरूर सोचते होंगे। भारत में कई कंपनियां एक्सचेंज ऑफर में नया स्मार्टफोन बेचती हैं। लेकिन एक हालिया रिसर्च में सामने आया है कि ज्यादातर भारतीय अपने पुराने स्मार्टफोन को बेचने से बच रहे हैं।
लोग पुराना स्मार्टफोन बेचकर नया खरीदने के बजाए उसे घर पर ही रखना पसंद कर रहे हैं। इसकी वजह पुराने हैंडसट से लगाव नहीं बल्कि एक चीज को लेकर डर है, जिसके चलते लोग पुराना स्मार्टफोन बेचने से कतराते हैं।

फोन रीसेल करने से प्राइवेसी जाने का डर
मोबाइल रिसेलिंग प्लेटफॉर्म कैशिफाई (Cashify) के एक ताजा सर्वे ने भारत के सेकंड-हैंड स्मार्टफोन बाजार की एक बड़ी सच्चाई को उजागर किया है। 8,000 लोगों पर किए गए इस सर्वे के मुताबिक, 69% भारतीय महज इसलिए अपना पुराना फोन नहीं बेचते क्योंकि उन्हें अपनी प्राइवेसी छिनने का डर सताता है।आंकड़े बताते हैं कि 56.6% लोगों ने कभी न कभी अपना फोन बेचा या एक्सचेंज किया है, जो यह दर्शाता है कि पुराने फोन का बाजार अब मुख्यधारा का हिस्सा बन चुका है। लेकिन इसके बावजूद, 74% उपभोक्ताओं के मन में यह खौफ बना रहता है कि फोन बिकने के बाद उनके निजी डेटा का गलत इस्तेमाल हो सकता है।

बढ़ रही है भागीदारी, लेकिन भरोसा नहीं
कैशिफाई के सह-संस्थापक नकुल कुमार का कहना है कि स्मार्टफोन रीसेल बाजार में लोगों की भागीदारी और जागरूकता दोनों बढ़ रही हैं, लेकिन डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी अब भी पूरी तरह उपभोक्ताओं पर ही है।उन्होंने कहा कि आज के स्मार्टफोन में वर्षों का निजी, वित्तीय और पहचान से जुड़ा डेटा मौजूद होता है। ऐसे में जब रीसेल बाजार का आकार बढ़ रहा है, तो डेटा सुरक्षा को सिर्फ व्यक्ति की जिम्मेदारी मानना सही नहीं होगा। संगठित प्लेटफॉर्म और इस क्षेत्र से जुड़े सिस्टम को इसे अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी बनाना चाहिए।
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