कोरोनाकाल में मददगार बनीं यें महिलाएं
- फोटो : unicef
इतिश्री और मिनी का बचपन कष्ट में गुजरा। दोनों बिना परिवार के बड़ी हुईं। कई साल बाल देखभाल संस्थान में रहीं और वहीं से उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी की। मिनी के माता पिता एक दूसरे से अलग हो चुके थे। उन्हें सेंटर में छोड़ दिया और कभी मिलने तक नहीं आए। दोनों लड़कियों से यूथ काउंसिल फॉर डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के सहयोग से यूनिसेफ द्वारा चलाई जा रही 'आफ्टर केयर' पहल का लाभ उठाया ताकि सेंटर से बाहर के जीवन के लिए तैयार हो सकें। यहां मिनी को आतिथ्य प्रशिक्षण प्राप्त करने में मदद मिली और इतिश्री ने ग्राफिक डिजाइनर का कोर्स किया।
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