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अमर उजाला शब्द सम्मान 2025: ममता कालिया और अरमबम ओंगबी मेमचौबी को 'आकाशदीप', इन्हें मिलेगा श्रेष्ठ कृति सम्मान
अमर उजाला शब्द सम्मान
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
छाप (कविता) - सविता सिंह - वासना एक नदी का नाम है
यह सृष्टि की वासना है...स्त्रीवादी नजरिये से वासना, प्रेम जैसे शब्दों का मैं अपने ढंग से अर्थ खोज रही हूं। पितृसत्ता में जहां स्त्रियों का दर्जा कभी भी समान नहीं होता, उसकी मनुष्यता को नष्ट करने के हर प्रयास होते हैं। इन सबसे बचकर स्त्री अपने जीवन को गहराई में ले जाती है। वहां उसे पता चलता है कि यह सृष्टि की वासना है। उसमें कहीं कोई खोट नहीं है।
निर्णायक वक्तव्य- अब तक न बोली गई भाषा में प्रेम संभव है
कवयित्री सविता सिंह की कविताओं में अब तक न बोली गई भाषा में, न समझी गई शब्दावली में प्रेम संभव है। प्रेम नदी है, नदी प्रेम है। नदी पत्थरों पर गीत लिखती है। - वर्षा दास, प्रख्यात कवयित्री
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छाप (कथेतर) - नाइश हसन - मुताह
स्त्री की मर्यादा का प्रश्न - उन लड़कियों की जिंदगी को देखकर हैरान हुई, जिन्होंने जीवन में कई बार मुताह की तकलीफ को बर्दाश्त किया। दो बालिग लोग अगर सहमति से साथ रह रहे हैं तो कोई सवाल नहीं, लेकिन अगर इसमें मर्जी नहीं है और बहुत कुछ छिपा है तो यह सवाल स्त्री गरिमा और मर्यादा के बिल्कुल खिलाफ है। मैंने इसी नजरिये से इस किताब को लिखा है।
निर्णायक वक्तव्य- शोधार्थियों के लिए अनिवार्य किताब
मुताह जितने जख्म एक औरत के शरीर पर छोड़ती है, उससे ज्यादा उसकी आत्मा को घायल करती है। गंभीर शोधार्थियों व महिला मुद्दों पर काम करने वालाें के लिए यह एक अनिवार्य किताब है। - विभूति नारायण राय, जाने-माने लेखक
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छाप (कथा) - शहादत - कर्फ्यू की रात
समाज की रूढ़ियों पर बात - ये कहानियां मुस्लिम समाज की बुनियादी समस्याओं पर बात करती हैं। यह ऐसा है कि आप एक ऐसे नरम-नाजुक फल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अंदर से सड़ रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि जब समाज की रक्षा के लिए हम सब दांव पर लगा रहे हैं तो उन परंपराओं और रूढ़ियों पर भी बात की जाए, जिसने उसमें ठहराव ला दिया।
निर्णायक वक्तव्य- स्त्री अस्मिता का खामोश आख्यान
स्त्री की अस्मिता और स्वतंत्रता का खामोश आख्यान रचने वाला स्वर इतना युवा हो सकता है, यह चकित करने वाला अनुभव शहादत की कहानियां पढ़ते हुए होता है। - धीरेन्द्र अस्थाना, ख्यात कथाकार
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