आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Social Media Poetry: नये समय की नयी चुनौती

आज का शब्द
                
                                                         
                            नये समय  की  नयी  चुनौती
                                                                 
                            
प्रश्न  पुराने, यक्ष !  बदल दो ! 

वर्तमान   पर   चर्चा   करती
एक   सभा   है  अंधी  बहरी
कोई  कहता  नहीं  लोक  से
अब इसका अध्यक्ष बदल दो !

राजाओं  के    सम्मोहन  में
कब   तक    बैठोगे   पैताने
थोड़ी  हिम्मत  करो  नशे से -
जागो ,अपना पक्ष बदल दो !

सबको आया नहीं कभी भी
हर  युग  में प्रासंगिक रहना 
यदि वे  अपने  तीर बदल दें 
तुम भी अपने वक्ष बदल दो !

जहाँ जहाँ भी  पड़ें  सुनायी 
तुमको   गुप्तचरी   पदचापें 
बिना बताये उन महलों को
अपने अपने कक्ष बदल दो ! 

साभार: ज्ञान प्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से 

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

50 minutes ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर