आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मीर तक़ी मीर: इश्क़ हमारे ख़याल पड़ा है ख़्वाब गई आराम गया

mir taqi mir famous ghazal ishq humare khayal padha hai khwab gayi araam gaya
                
                                                         
                            

इश्क़ हमारे ख़याल पड़ा है ख़्वाब गई आराम गया
जी का जाना ठहर रहा है सुब्ह गया या शाम गया

इश्क़ किया सो दीन गया ईमान गया इस्लाम गया
दिल ने ऐसा काम किया कुछ जिस से मैं नाकाम गया

किस किस अपनी कल को रोवे हिज्राँ में बेकल उस का
ख़्वाब गई है ताब गई है चैन गया आराम गया

आया याँ से जाना ही तो जी का छुपाना क्या हासिल
आज गया या कल जावेगा सुब्ह गया या शाम गया

हाए जवानी क्या क्या कहिए शोर सरों में रखते थे
अब क्या है वो अहद गया वो मौसम वो हंगाम गया

गाली झिड़की ख़श्म-ओ-ख़ुशूनत ये तो सर-ए-दस्त अक्सर हैं
लुत्फ़ गया एहसान गया इनआ'म गया इकराम गया

लिखना कहना तर्क हुआ था आपस में तो मुद्दत से
अब जो क़रार किया है दिल से ख़त भी गया पैग़ाम गया

नाला-ए-मीर सवाद में हम तक दोशीं शब से नहीं आया
शायद शहर से उस ज़ालिम के आशिक़ वो बदनाम गया

एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर