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अमर उजाला शब्द सम्मान 2025: ममता कालिया और अरमबम ओंगबी मेमचौबी को 'आकाशदीप', इन्हें मिलेगा श्रेष्ठ कृति सम्मान
अमर उजाला शब्द सम्मान
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
थाप (पहली किताब) - मनीष यादव - सुधारगृह की मालकिनें
खुद के प्रति मौन - मैंने उन स्त्रियों के लिए कविताएं लिखीं, जो अक्सर संघर्ष करती हैं, लेकिन खुद के प्रति मौन रहती हैं। परंपराओं का विरोध नहीं कर पाती हैं, उनके लिए एक आवाज बनने का प्रयास किया है। ‘सुधारगृह की मालकिनें’ में आपको बहुत सारी कविताएं दिखेंंगी, उन सभी मांओं के लिए, जो मां होने के अलावा बहुत कुछ होना चाहती रहीं।
निर्णायक वक्तव्य - कच्चेपन का सच्चापन
मनीष यादव की कविताओं में किंचित कच्चापन तो है, पर वे सच्चेपन की गहरी प्रतीति देती हैं, जिनमें मानवीय भावों से भरा असंख्य तारों से जगमग आसमान है। - बलराम, चर्चित कहानीकार
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श्रेष्ठ अनुवाद - भाषाबंधु - सुजाता शिवेन- चरु चीवर और चर्या (मूल ओड़िया)
जीवंतता की बड़ी चुनौती- अनुवाद एक ऐसा काम है, जो कृति के भीतर उतरकर उसे दूसरी भाषा में जीवंत कर देने की चुनौती देता है। प्रदीप दाश का यह ओड़िया उपन्यास एक बहुसम्मानित कृति है, जिसे हिंदी में प्रस्तुत करना एक चुनौती थी। मैंने इसे स्वीकार करके ओड़िया और हिंदी के बीच एक सशक्त सेतु बनाने की हरसंभव कोशिश की है।
निर्णायक वक्तव्य- तनी हुई रस्सी पर चलना
किसी भाषा में व्यक्त कथ्य या विचारों की गहनता को अनुवाद के माध्यम से दूसरी भाषा में पिरोना तनी हुई रस्सी पर चलने जैसा है। सुजाता शिवेन ने अनुवाद में मूल-कृति को जीवंत किया है। - दामोदर खड़से, प्रख्यात रचनाकार
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