आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Vishwa Kavya: फ़िलिस्तीनी कवि महमूद दरवेश की कविता-  जब पत्थर थे मेरे शब्द

विश्वकाव्य
                
                                                         
                            जब मिट्टी थे मेरे शब्द
                                                                 
                            
मेरी दोस्ती थी गेहूँ की बालियों से

जब क्रोध थे मेरे शब्द
ज़ंजीरों से दोस्ती थी मेरी

जब पत्थर थे मेरे शब्द
मैं लहरों का दोस्त हुआ

जब विद्रोही हुए मेरे शब्द
भूचालों से दोस्ती हुई मेरी

जब कड़वे सेब बने मेरे शब्द
मैं आशावादियों का दोस्त हुआ

पर जब शहद बन गए मेरे शब्द
मक्खियों ने मेरे होंठ घेर लिए

अनुवाद : गीत चतुर्वेदी

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

4 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर