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Social Distancing Shayari: जान है तो जहान है दिल है तो आरज़ू भी है 

उर्दू अदब
                
                                                         
                            जान है तो जहान है दिल है तो आरज़ू भी है 
                                                                 
                            
इशक़ भी हो रहेगा फिर जान अभी बचाइए 
- सऊद उस्मानी

वस्ल को मौक़ूफ़ करना पड़ गया है चंद रोज़ 
अब मुझे मिलने न आना अब कोई शिकवा नहीं 
- अज्ञात

शाम होते ही खुली सड़कों की याद आती है 
सोचता रोज़ हूँ मैं घर से नहीं निकलूँगा 
- शहरयार

कुछ रोज़ नसीर आओ चलो घर में रहा जाए 
लोगों को ये शिकवा है कि घर पर नहीं मिलता 
- नसीर तुराबी

कपड़े बदल कर बाल बना कर कहाँ चले हो किस के लिए 
रात बहुत काली है 'नासिर' घर में रहो तो बेहतर है 
- नासिर काज़मी

अफ़्सोस ये वबा के दिनों की मोहब्बतें 
इक दूसरे से हाथ मिलाने से भी गए 
- सज्जाद बलूच
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4 वर्ष पहले

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