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शारिक़ कैफ़ी: इक दिन ख़ुद को अपने पास बिठाया हम ने

उर्दू अदब
                
                                                         
                            इक दिन ख़ुद को अपने पास बिठाया हम ने 
                                                                 
                            
पहले यार बनाया फिर समझाया हम ने 

ख़ुद भी आख़िर-कार उन्ही वा'दों से बहले 
जिन से सारी दुनिया को बहलाया हम ने 

भीड़ ने यूँ ही रहबर मान लिया है वर्ना 
अपने अलावा किस को घर पहुँचाया हम ने 

मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली 
ऐसा मरने का माहौल बनाया हम ने 

घर से निकले चौक गए फिर पार्क में बैठे 
तन्हाई को जगह जगह बिखराया हम ने  आगे पढ़ें

4 वर्ष पहले

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