आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

संजय भट्ट: होती है ज़िंदगी से शिकायत कभी कभी

sanjay bhatt famous ghazal hoti hai zindagi se shikayat kabhi kabhi
                
                                                         
                            


होती है ज़िंदगी से शिकायत कभी कभी
याद आती है किसी की रफ़ाक़त कभी कभी

वैसे तो हम नहीं हैं तिरी बात के ख़िलाफ़
मर जाती है मगर ये शराफ़त कभी कभी

इतना न ख़ुद को देख ज़माने की आँख से
दे दे कुछ अपनी आँख को ज़हमत कभी कभी

यूँ तो रखा है दर्द को सीने के पास पास
होती है फिर भी दर्द से वहशत कभी कभी

कोई तो बात छेड़ तू अपने रक़ीब से
बेहतर है दुश्मनी से मोहब्बत कभी कभी

शर्मा के फिर से देख हमारे क़रीब आ
मिलती है दिल-लगी में सुहूलत कभी कभी

2 दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर