इश्क़ की इक रंगीन सदा पर बरसे रंग
रंग हो मजनूँ और लैला पर बरसे रंग
कब तक चुनरी पर ही ज़ुल्म हों रंगों के
रंगरेज़ा तेरी भी क़बा पर बरसे रंग
ख़्वाब भरें तिरी आँखें मेरी आँखों में
एक घटा से एक घटा पर बरसे रंग
इक सतरंगी ख़ुश्बू ओढ़ के निकले तू
इस बे-रंग उदास हवा पर बरसे रंग
ऐ देवी रुख़्सार पे तेरे रंग लगे
जोगी की अलमस्त जटा पर बरसे रंग
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