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Ghar Shayari: मैं जिस मकान में रहता हूँ उस को घर कर दे

उर्दू अदब
                
                                                         
                            ये दश्त वो है जहाँ रास्ता नहीं मिलता 
                                                                 
                            
अभी से लौट चलो घर अभी उजाला है 
~ अख़्तर सईद ख़ान

मिरे ख़ुदा मुझे इतना तो मो'तबर कर दे 
मैं जिस मकान में रहता हूँ उस को घर कर दे 
~ इफ़्तिख़ार आरिफ़
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3 वर्ष पहले

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